डिंग डिंगा डिंग नाटक नाटक।।।।

ये शब्द छोटे छोटे बच्चों द्वारा बोला जाता है जब वो बहुत ज्यादा खुश होते है।

बाबे रे चाला रे भायड़ा बाबे रे चाला रे भायड़ा
खुल गयो देवरे रो फाटक फाटक
डिंग डिंगा डिंग नाटक नाटक।।।

1. तंदुरे रा तार बजे है, हरजी भाटी खूब नाचे है
कर न भाया नाटक शाटक

तंदुरे के तार बज रहे है हरजी भाटी जी बाबा के नाम पर खुश होकर नाच रहे है,
तुझे किस बात की लाज है तू अहंकार को छोड़ और खुशी में नाच।।

2. कोई खावे लाडू पेड़ा, रोज रोज न लागे गेड़ा
पूरी बाटी चाटक चाटक
(बाबा के भक्त सेवा कर रहे है कोई मिठाईया खिला रहा है कोई भोजन करवा रहा है)
रोज रोज रुनिचे में दर्शन का भाग्य नही है क्योकि भक्त बहुत दूर दूर से आते है)
भक्त को दर्शन की जल्दी है और जल्दी जल्दी भोजन कर रहा है।

3. कोलायत रो सरवर गहरो, डुबकी रो है मनड़ो मेरो,
नाहलो भाया छापक छापक

कोलायत में जो कपिल मुनि जी का सरवर है वो बहुत गहरा है, उसमे नहाने से सब कस्ट दूर होते है, उसमे मेरा भी मन कर रहा है, और में और मेरे मित्र उसमे खुसी इशनान करेंगें

4. डीजे आलो डीजे बजावे, महारली न कोई सुन ना पावे
करियो न वी खाटक वाटक,

डीजे वाले डीजे बजा रहे है में जो कह रहा हु वो कोई नही सुन राहा,
आप इधर उधर की बाते न करे और बाबा के भजन सुने।

5.
5 जीडी को दर्शन लिख रहेओ चंदरभान जी सागे दिश रहयो, सुनील कागड़ा नाचक नाचक, हैप्पी गावे साचक, सानी गावे साचक,

5जीडी में रहने वाला लेखक दर्शन और घड़साना का लेखक चंदरभान ये भजन साथ मिलकर लिख रहे है,
सुनील कागड़ा खुसी में नाच रहा है
हैप्पी और सानी ने जब बाबा की महिमा गाई तो उन्हें लगा की उनकी गायकी अब पूर्ण हुई है।